लखनऊ/बलिया: उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब बहुजन समाज पार्टी (बहुजन समाज पार्टी) के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की। यह कार्रवाई लखनऊ के गोमती नगर स्थित आवास के साथ-साथ बलिया और अन्य स्थानों पर भी की गई।
हालांकि छापेमारी अपने आप में बड़ी खबर थी, लेकिन इससे भी ज्यादा चर्चा उस बयान की हो रही है जो योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सार्वजनिक रूप से दिया।
मंत्री का बयान बना राजनीतिक मुद्दा
उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि उमाशंकर सिंह उनके समधी हैं और गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उन्होंने एजेंसियों की कार्रवाई को संवेदनशील परिस्थितियों में कठोर बताते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।
एक सत्तारूढ़ दल के मंत्री का विपक्षी विधायक के समर्थन में खुलकर बयान देना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
कौन हैं उमाशंकर सिंह?
उमाशंकर सिंह 2022 विधानसभा चुनाव में BSP के एकमात्र विजयी विधायक रहे। 403 सदस्यीय विधानसभा में वे पार्टी की अकेली आवाज हैं। वे बलिया की रसड़ा सीट से लगातार जीत दर्ज करते रहे हैं।
राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ और बाद में उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी काम किया। क्षेत्र में उनकी छवि एक प्रभावशाली और जनसंपर्क रखने वाले नेता की रही है।
विपक्ष का हमला
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप दोहराया।
यह देखना अहम होगा कि आयकर विभाग की जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं। फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और किसी तरह का आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है।
राजनीतिक रूप से यह प्रकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें सत्ता और विपक्ष के नेताओं के बीच पारिवारिक संबंधों की भी चर्चा हो रही है।